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Friday, December 30, 2011

लोकपाल को लटका दिया.....|

कसाब: जेलर,ये लोकपाल ने मुझसे भी बड़ा कोई
जुर्म किया है क्या ?.........जेलर: क्यूँ
क्या हुआ ?......कसाब: सरकार ने मेरे
को तो अभी तक नहीं लटकाया ,
उसको लटका दिया.....|

Thursday, December 29, 2011

जीत धर्म की ही होगी.


महान!!!!!!!!!! भारतीय सांसदीय के लोकशाही मंदीर में ही लोकशाही के रक्षक , भ्रष्ट्र,बेईमान नेता, नौकरशाही का  दुश्मन लोकपाल बिल का फिर कतल , गर्भपात हो गया है. कंस ने भविष्य में अपने को मारने वाले भांजे की डर से अपनी ही बहन के बच्चों का कतल कीया था; उसी तरह कांग्रेस भाजप और सब राजनैतिक दलों के  सोनिया , राहुल मनमोहन , सुषमा,  लालू मुलायम ममता इन सभी बेईमान भ्रष्ट्र अधर्मी ने नेताओं  ने मिलजुलकर भविष्य की डर ये गर्भपात कतल कीया.
 कंस के लाख प्रयासों के बाद भी उसे मारने वाले कृष्ण का जनम हो ही गया. और बेईमान भ्रष्ट्र कंस मारा  गया. ये इतिहास है. आज के भ्रष्ट्र बेईमान अधर्मी नेता ये इतिहास भूल गये और कंस जैसा बर्ताव करने लगे . ...   मौत के डर से गये चालीस साल से बारबार लोकपाल का कतल करने लगे. सत्ता संपत्ति के मगरुरी में जल्लोष करने लगे. ...... पर उन्हें ये मालूम नही की जनता की कोख में जनलोकपाल का बीज बो दीया गया है. आन्ना और आन्ना टीम ने  जनता की मन में इस जनलोकपाल बीज सक्षमतासे लगाया है . अब उसे उखाड़ क़र फेकने की ताकद कीसी भी भ्रष्ट्र अधर्मी नेता में नही. एक ना एक दिन मजबूत जनलोकपाल का निर्माण होगा ही. और कृष्ण ने जिस तरह कंस सहित कौरव का नाश कीया उसी तरह ये जन लोकपाल भ्रष्ट्र बेईमान नेताओं का नाश करेगा ही. तब कंहा गया था तेरा धर्म? इस सवालका  जबाब  इन नेताओं को देना पड़ेगा. और मरना ही पड़ेगा. यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थ्ससनमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। ये कृष्णजी कहके ही गये है. आज के अधर्म का नाश करने के लिये ही भगवान ने आन्ना और आन्ना टीम के रूप में जनम लिया है . जीत धर्म की ही होगी.         

मुहं मे महाराज और बगल मे मदिरा मदिराक्षी.

शिवसेना नेत्याच्या पत्नीच्या बारवर पोलिसांचा छापा. येथे देहविक्रयाचा व्यवसाय चालतो अशी खबर मिळाल्यानंतर पोलिसांनी कारवाई करून नऊ मुलींची सुटका केली. त्यातील दोन मुली अल्पवयीन आहेत..........उठता बसता शिवाजी महाराजांचे आणि मराठी माणसाचे नाव घेणाऱ्या शिवसेनेच्या अनेक नेत्यांचे मुंबईत बार आहेत .........पण तेथे हे धंदे सुद्धा चालतात आश्‍चर्य आहे.  बारचा परवाना माजी विरोधी पक्षनेते व शिवसेनेचे आमदार रामदास कदम यांच्या पत्नी ज्योती कदम यांच्या नावे आहे.  तसे कदम यांनी मान्य केले आहे. मुहं मे महाराज और बगल मे मदिरा मदिराक्षी. महाराज आम्हाला माफ करा.
मुंबईतील अनेक बार नेत्यांच्या नातेवाईकांच्या नावे आहेत. काही बारमध्ये त्यांची बेनामी पार्टनरशिप आहे. अंधेरीतील एका बारमध्ये काँग्रेस नेत्याची पार्टनरशिप असल्याची चर्चा आहे. काही दिवसांपूर्वी सांताक्रुझमध्ये संगीत बारवर कारवाई झाली होती, तो निहार ठाकरे यांच्या मालकीचा आहे. JAY HO !! JAY MAHARASHTRA !! JAY SHIVAJI !!

Monday, December 26, 2011

Amul known for its creative ads


December 13: Amul paid tribute to late cartoonist Mario Miranda in their new ad. The ad features the Amul girl with Miss Fonseca and Miss Nimbupani, who are Mario's well-known creations.

Mario, who was 85, died in Goa on Monday (December 12, 2011) after a prolonged illness. 

मुर्गी किसी ने चुराई ...........


मुर्गी किसी ने चुराई ...........
नेताओं के बयान .......हमारे यहाँ के नेताओं का कोई भी बयान किसी व्यंग से कम नहीं होता...तभी तो कहते हैं, कि जब नेता कानून बनता है तो वो मजाक बन के रह जाता है, और जब वो मजाक बनाता है..तो वो कानून बन जाता है...
महात्मा गांधीस्वतंत्रा के ६० साल बाद भी मुर्गी चुराई जाती ये मेरे लिये बड़ी दुख:द घटना है . मै मुस्लमान भाई और हिन्दुवों को अमन शान्ति बनाये रखने की अपील करतां हुं. इश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान.
लोकमान्य टिळक – देश में मुर्गी चोरी होती है , शासन को अक्कल है या नही? शासन का माथा ठिकाने पर है क्या ?
आचार्य अत्रे :- गये १० हजार साल में ऐसी मुर्गी चोरी हुवी नही, और अगले १० हजार साल में इस तरह की मुर्गी चोरी होंगी नही...............

Sunday, December 25, 2011

चीन के साथ लड़ाई मे संघ ने सेना के साथ...............

क्या आप जानते है,1962 में चीन के साथ लड़ाई मे संघ ने सेना के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर बहादुरी से सहयोग किया था और अपने 43 स्वंयसेवक का बलिदान दिया .
जिससे नेहरु ने संघ को गणतंत्र दिवस के परेड पर संघ को भी एक ताकत के तौर पर परेड मे आमंत्रित किया ..और.........
 जब दस हज़ार स्वंयसेवक अपने गणवेश मे कदम ताल करते हुए इंडिया गेट से गुजरे तो पूरे देश ने तालियों की गडगडाहट से उनका स्वागत किया

"जनसेवक" के भेस में नेता, देखो "लूटमार" मचाएगा.

हे रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा ,हंस चुगेगा दाना तुनका कौवा मोती खायेगा |मंदिर सूने -सूने होंगे भरी रहेंगी मधुशाला |राजा और प्रजा दोनों में होगी निस दिन खींचांतानी ,कदम-कदम पर करेंगे दोनों अपनी-अपनी मनमानी |अरे जिसके हाथ में होगी लाठी भैंस वही ले जायेगा i सीते बोलीं ” प्रभु क्या कलयुग में धरम -करम नहीं होगा ? प्रभु बोले धरम भी होगा करम भी होगा परन्तु शर्म नहीं होगी | जैसा हठ व् बेशर्मी ये मोजुदा सरकार दिखा रही है ,न भाषा पर नियंत्रण न उम्र का आदर भाव इसको देख कर चीन के थियानमन चौक की याद आ रही है | ............अन्ना रहेगा भूखा प्यासा और कसाब बिरयानी खाएगा।

Saturday, December 24, 2011

भ्रष्ट भारत माझा देश आहे


भ्रष्ट भारत माझा देश आहे । सगळे भ्रष्ट भारतीय माझे बांधव आहेत ।
माझ्या भ्रष्ट देशावर माझे प्रेम आहे ।
माझ्या भ्रष्ट देशातल्या लाचार आणि भाडखाऊ परंपरांचा मला अभिमान आहे ।
त्या भ्रष्ट परंपरांचा पाईक होण्याची पात्रता माझ्या अंगी यावी म्हणून मी सदैव प्रयत्न करीन ।
मी माझ्या भ्रष्ट नेत्यांचा, भ्रष्ट राजकारण्यांचा आणि भ्रष्ट नोकरशहांचा मान ठेवीन
आणि प्रत्येक लाचाराशी सौजन्याने वागेन ।
माझा भ्रष्ट देश आणि माझे भ्रष्ट देशबांधव      यांच्याशी निष्ठा राखण्याची मी प्रतिज्ञा करीत आहे ।
त्यांचे कल्याण आणि त्यांची समृद्धी ह्यांतच माझे सौख्य सामावले आहे ।
आंतरजाल वरून साभार..

देशभक्त हायकमाड की जय हो........

देखो..... देखो....... देखो...... आन्ना देशद्रोही है, इसका सबूत .......देखो..  १९८३ में आन्ना नानाजी देशमुख से मिले थे.  आन्ना और नानाजी का ब्लैक एंड व्हाइट फोटो ये साबित करता है. जय हो..... जय हो....... देशभक्त हायकमांड  की  जय हो........
सोनियाने ने कहां आन्ना तो भूखे रहते है ,.......मगर खूब खाती है, टीम आन्ना ........., हम कहते है खूब खाती है हायकमाड और भुखी रह जाती है जनता.......आत्महत्या करती है.......जनता.

विद्या बालनचा डर्टी सिनेमा पाहीला हे तुम्ही विसरलात??

Uday Kshirsagar
सुप्रभात मित्रांनो.
आज नागपूर वरून वापस मुंबई ला वापस जाणाऱ्या व अधिवेशनात कोणत्याच समाजाच्या वर्गा साठी प्रश्न न विचारणाऱ्या व नुसते मजा मारून जाणाऱ्या आमदारांना लाज वाटो हि ईश्वरचरणी विशेष प्रार्थना.
thanthanpal says , हा आरोप आम्हास मान्य नाही. केवळ प्रश्न विचाण्याने प्रश्न सुटत नाहीत. म्हणुन आम्ही सिनेतारकांच्या अंधाऱ्या तीला लुटणाऱ्या सिनेजगताचा सखोल अभ्यास करण्या साठी विद्या बालनचा डर्टी सिनेमा पाहीला हे तुम्ही विसरलात?? या मुळे मिडिया ने सामान्य जनतेने आम्हास बदनाम केले टी गोष्ट वेगळी. आम्ही सिनेतारकांच्या प्रश्नाचा समस्येचा अभ्यास जनतेचा राग ओढवून केलाच की. आम्हास समजून घ्या . आम्ही सुद्धा मानव प्राणीच आहोत. आणि चौफुला वारंग फाटा पश्चिम महाराष्ट्रा तीळ वेगवेगळ्या खाजगी लावणी बैठकीला सुद्धा त्यांच्या समस्या दूर करण्यास जातोच की. या दुर्लक्षित कलावंतिणीना आम्हीच तर  उजेडात आणले हे लक्षात घ्या..........

Thursday, December 22, 2011

पिताजी, पहले आप बताइए, आप को ये अनोखा जवाब कहाँ से सूझा ?”

दैनिकभास्कर डॉट कॉम के हास्य सेक्शन के जोक्स को पाठकों ने हाथों हाथ लिया। साथ ही इन जोक्स को पाठकों ने खूब शेयर भी किया। साल 2011 में दैनिकभास्कर के सबसे चर्चित और पढ़े गए 10 जोक्स ये रहे-


1. सुहागरात में पत्नी का खुलासासुहागरात को पति :पत्नी से मैं शादी से पहले 10 औरतों के साथ सो चुका हूं। पत्नी replied "मुझे पता था जब कुंडली मिली है तो आदतें भी ज़रूर मिलेंगी "


2. दुल्हन को घूंघट में क्यूँ रखा जाता है ?दुल्हन को घूंघट में क्यूँ रखा जाता है ? सोचो … सोचो … सोचो … … सोचो … नहीं पता … ? ताकि किसी के मुंह से ये न निकल जाये …. अरे…. ये तो मेरी वाली है … !!!


3. सुहागरात को दूल्हे ने दुल्हन से पूछा:सुहागरात को दूल्हे ने दुल्हन से पूछा: आखिर तुम खिड़की से बाहर इस तरह कब तक झांकती रहोगी? दुल्हन- मेरी मां ने मुझे बताया था कि सुहागरात मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात होगी इसलिए मैं इस रात को इसके आखिरी पल तक निहारना चाहती हूं।


4. पति : मुझे शर्म आती है।पत्नी: अरे आप अली भाई की बीवी के जनाजे में नहीं गए? पति: मुझे शर्म आती है। पत्नी: अजीब आदमी हो, इसमें किस बात की शर्म। पति: अब किस मुंह से जाऊं? पहले भी अली भाई की दो बीवियों के जनाजे में जा चुका हूं। पर उन्हें एक बार भी अपने यहां बुलाने का मौका नहीं आया।


5. एक सुंदर लड़की ने एक अमीर बूढ़े आदमी से शादी कर लीएक सुंदर लड़की ने एक अमीर बूढ़े आदमी से शादी कर ली। उस लड़की की पड़ोसन ने उससे पूछा- आपने इनमें क्या देखा? लड़की बोली- एक तो इनकी इंकम और दूसरे इनके दिन-कम।


6. संता ने एक बेहद खूबसूरत और सेक्सी महिला को देखासंता ने एक बेहद खूबसूरत और सेक्सी महिला को देखकर क्या सोचा होगा ? ….. … … सोचो ….. ? … सोचो …. ? … … यही कि … काश ! ये मेरी माँ होती तो मैं भी इतना ही सुन्दर होता … !!!


7. पापा-पापा, कॉल-गर्ल किसे कहते हैं ?आठ साल के एक बालक ने एक दिन अपने पिता से पूछा—”पापा-पापा, कॉल-गर्ल किसे कहते हैं ?
सवाल सुनकर पिताजी चकरा गये हडबड़ा कर बोले–”बेटा वो……..वो ऐसा है, टेलीफ़ोन के जो कॉल सेंटर होते हैं ना, उन पर काम करने वाली लड़कियों को कॉल-गर्ल कहते हैं. लेकिन ये तो बताओ तुम्हे ये अनोखा सवाल कहाँ से सूझा ?” पुत्र ने पलट कर कहा –”पिताजी, पहले आप बताइए, आप को ये अनोखा जवाब कहाँ से सूझा ?”

8. संता की सुहागरातसुहागरात को संता confuse हो गया कि बीवी से क्या बात करे. आखिरकार बहुत सोचने-समझने के बाद बोला – “आपके घरवालों को मालूम है कि आप यहाँ मेरे साथ हो ?”

9. संता और बंता जंगल में घूम रहे थेसंता और बंता जंगल में घूम रहे थे। अचानक सामने शेर आ गया। बंता ने शेर की आंखों में मिट्टी फेंकी,और दौड़ने लगा और संता को भी दौड़ने को कहा। संता: मैं क्यों दौडूं,मिट्टी तो तुमने फेंकी है।

10. बीवी की तरह सेक्स करोगी?काल गर्ल ने बस स्टैंड पर खड़े संता जी से पूछा: चलता है क्या,सेक्स करेंगे। संता: जरूर,पर अगर मेरी बीवी की तरह करोगी तो? गर्ल: हां करूंगी लेकिन वो कैसे करती है? संता: मुफ्त में।


Friday, November 11, 2011

शिक्षण दिन रीकाम्या वर्गातच साजरा......

गेल्या आठ दिवसा पासून भारताचे पहिले  केंद्रीय शिक्षण  मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आझाद यांच्या छायाचित्राची  ,  माहितीची मागणी  अचानक  वाढली. नेहमीच्या फोटोग्राफी दुकानात
यांचे छायाचित्र उपलब्ध नसल्या मुळे  यांचे छायाचित्र घेण्या करता शाळा चालकांनी इंटरनेट वर  गर्दी केली होती.
अचानक मागणी वाढण्याचे  कारण  .... भारत सरकार ने,  त्यांचा वाढदिवस पहील्यांदाच मोठ्या उत्सवात साजरा करण्याचे फर्मान काढले आहे  ; असे समजले.. मौलाना अब्दुल कलाम आझाद हे १९४७ ते १९५८ पर्यंत  भारताचे पहिले शिक्षण मंत्री होते. भारतीय स्वातंत्र्य संग्रामात त्यांचा सक्रीय सहभाग होता. हिंदू-मुस्लीम ऐक्याचे ते पुरस्कर्ते होते....... पण ......
......भारतात प्रत्येक गोष्टीचे राजकारण होत असल्या मुळे त्यांना भारत रत्न सुद्धा त्यांच्या मृत्यू नंतर तब्बल ३४ वर्षांनी १९९२  मध्ये देण्यात आला.  त्यांच्या आधीच राजीव गांधी रामचंद्रन व्ही व्ही गिरी , इंदिरा गांधी यांना हा पुरस्कार देण्यात आला होता हे लक्षात घेण्या सारखे आहे. आणि त्यांचा वाढदिवस मोठ्या प्रमाणात साजरा करण्यास त्यांच्या मृत्यू नंतर  तब्बल ५४ वर्षांनी ११-११-११ चा शुभ  मुहूर्त सरकारला मिळाला,  असेही या ११-११-११- एक महात्म्य आहे. उत्तर प्रदेश सह अनेक राज्यांच्या  निवडणुका डोळ्या समोर ठेवून मतांच्या राजकारणा साठीच हा निर्णय घेतला गेला हे मात्र जनतेच्या लक्षात आले.
या महमद तुघलकी निर्णयाचा मोठा फटका मात्र शाळा मास्तरांना, विद्यार्थ्यांना बसला आहे. दिवाळीच्या सुट्ट्या या १२ नोव्हेबर रोजी संपून त्या दिवशी शाळा उघडणार या हिशोबाने सर्व वेळा पत्रक, बाहेरगावाहून येण्याचे नियोजन आखले गेले होते.......पण या अखेरच्या क्षणी घेतल्या गेलेल्या निर्णयाने नियोजनाचे संपूर्ण वेळापत्रक कोसळले आणि आज शाळांत विद्यार्थ्या सह मास्तरांची उपसस्थिती अत्यंत नगण्य होती......
..............त्या मुळे शिक्षण दिन रीकाम्या वर्गातच  साजरा करून  पंतप्रधानांचा संदेश वाचून दाखवावा लागला.

Monday, November 7, 2011

जिंदगीका सफर है येह कैसा सफर

जिंदगीका सफर है येह कैसा सफर
कोई समजा नहीं कॉई जाना नहीं
है कैसी डगर चलते है सब मगर,
कोई समजा नही कोई जाना नहीं
जिंदगीको बहोत प्यार हमने कीया
मौतसे भी महोब्त निभायेंगे हम
रोते रोते जमानेमे आये मगर
हसते हसते जमानेसे जायेंगे हम
जायेंगे पर किधर है किसे येह खबर
कोई समजा नहीं कोइ जाना नहीं
ऐसे जीवन भी है जो जीये ही नहीं
जीनको जीनेसे पह्ले ही मौत आ गई
फूल ऐसे भी है जो खीले ही नहीं
जीनको खीलनेसे पह्ले ही खीझा आ गई
है परेंशा नजर थक गये चारागर
कॉई समजा न्ही कोई जाना नही
है येह कैसी डगर चलते है सब मगर
कोई समजा नही कोई जाना नहीं.     
: SAFAR Singer(s): KISHORE KUMAR


Saturday, November 5, 2011

टीम अण्णाचे सदस्य अरविंद केजरीवाल यांनी पंतप्रधानांना लिहिलेले हे पत्र जसेच्या तसे

पंतप्रधान महोदय,
आपल्या सरकारने माझा राजीनामा मंजूर करण्याच्या बदल्यात सव्वानऊ लाख रुपये जमा करण्यास सांगितले आहे (यात दीड लाख रुपये संगणकांसाठी घेतलेल्या कर्जाचे आहेत). मी काहीही गुन्हा केलेला नसताना मला शिक्षा दिली जात आहे, असे मागील पाच वर्षांपासून मी सरकारला सतत सांगत असलो तरी सरकार हे समजून घ्यायला तयार नाही. नोव्हेंबर 2002 मध्ये दोन वर्षांच्या अभ्यास रजेनंतर मी पुन्हा आयकर कार्यालयात रुजू झालो. त्यानंतर एक वर्षभर मला टोलवण्यात आले. मला कुठली पोस्टिंगच दिली नाही. वर्षभर घरबसल्या मला सरकारने पगार दिला. मी बिनकामाचा होईन, अशी भीती मला वाटू लागली..................


Friday, November 4, 2011

http://www.facebook.com/shivin.garg

http://www.facebook.com/shivin.garg
भारतीय प्रेस परिषद के नये अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने भारतीय इलेक्ट्रानिक एवं प्रिण्ट मीडिया को सरेआम लताड़ते हुए एक इंटरव्यू में कहा है कि -
1) भारत का मीडिया महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, बदतर स्वास्थ्य सुविधाओं की खबरें दिखाने की बजाय क्रिकेट, फ़िल्में, ज्योतिष, जादूटोना और फ़ैशन जैसी अनावश्यक बातें जानबूझकर दिखाता है…
2) मीडिया क्षेत्र में काम करने वालों में 80% से भी अधिक पत्रकारों-कर्मचारियों को आर्थिक गतिविधियों, राजनीति शास्त्र, साहित्य अथवा फ़िलॉसॉफ़ी इत्यादि के बारे में जरा भी ज्ञान नहीं है, संभवतः उन्होंने कभी इसकी पढ़ाई भी नहीं की होगी।
3) भारत का मीडिया जानबूझकर देश के लोगों को तोड़ने का काम कर रहा है…
4) भारत के मीडिया को "प्रशिक्षित" करने की भी जरुरत है, उसे भारत के गरीबों और समस्याओं पर फ़ोकस करना चाहिए, न कि लेडी गागा के नाच और करीना कपूर के रोमांस पर…
5) मीडिया कर्मियों एवं मालिकों को "डण्डे" का डर अवश्य होना ही चाहिए, इसकी व्यवस्था कैसी हो इस पर बहस की जा सकती है…
6) मीडिया को भी सूचना के अधिकार एवं लोकपाल के तहत लाया जाना चाहिए, तथा झूठी खबरें परोसने पर इन्हें भी जुर्माना एवं सजा जैसे प्रावधानों का सामना करना पड़े…
नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज भी जस्टिस काटजू के इस प्रस्ताव से "सैद्धांतिक" रूप से सहमत हैं।
(अ) यदि "बिग बॉस" या "राखी का स्वयंवर" जैसे छिछोरे शो प्रतिबंधित हो भी जाएं, तो भारत की जनता पर कोई आफ़त नहीं आने वाली…
(ब) यदि शाहरुख, सलमान या आमिर के कूल्हे मटकाऊ दृश्य अथवा ऐश्वर्या की "ऐतिहासिक गोद भराई" न भी देखें तो हमारा पाचन तंत्र बिगड़ने वाला नहीं है…
अब मीडिया को उसकी औकात और जिम्मेदारी दोनों ही दिखाने का समय आ चुका है।

Wednesday, November 2, 2011

now u r bcmg ideal 4 our next gen also............

   इंडीया की गरीबी तब भी खतम नही होगी !!  we shl over come...v shl over cm....1 day...i do blv ..tht v shl over cm 1 day..congrats kasab ,now u r bcmg ideal 4 our next gen also..

Friday, October 28, 2011

अमिरों के इस तमाशा को उत्तर प्रदेश सरकार ने मनोरंजन कर भी माफ ....

28 से 30 अक्टूबर के बीच ग्रेटर नोएडा (भारत) में पहली बार फॉर्मूला 1 का आयोजन होगा! यह पहला मौका होगा जब भारत के तेज रफ्तार के दीवानों को अपनी दीवानगी लाइव दिखेगी! आज भारतीयों को रेसिंग कार शर्यत ट्रेक से ज्यादा  रोटी,कपडा मकान के साथ साथ बिना खड्डे की साफ सडके और २४ घंटे अखंड बिजली, किफायती दाम  मे स्वास्थ सेवायें और बच्चों  के लिये शिक्षा इनकी ज्यादा जरुरत है.! मगर अफसोस की बात है कि ; आज इन समस्या सामना कर के, भारतीयों को अच्छी सुविधायें प्रदान कराने की क्षमता  किसी भी राजनैतिक नेता के पास नहीं! 


Thursday, October 20, 2011

अबबब!!!!!!! केव्हढा मोठा भ्रष्ट्राचार......डोळे पांढरे होण्याची वेळ आली आहे.

अबबब!!!!!!!  केव्हढा मोठा भ्रष्ट्राचार......डोळे पांढरे होण्याची वेळ आली आहे. बेदी नी भ्रष्ट्राचार करावा आता हद्द झाली. अश्याच  छोट्या छोट्या भ्रष्ट्राचारातून करोडो रुपयांचा  घोटाळा पुढे होतो. या बाईना ताबोडतोब अटक करून राजा कलमाडी कानमोली रेड्डी बंधू  येडाआप्पा, अमरसिंग यांच्या बरोबर तिहाड जेल मध्ये टाकावे.......... टीम आण्णा ची जाहीर चोकशी सरकारी न्यायधीश आणि लोकसभा सांसद सदस्या मार्फत करून...... त्यांच्या वर महाभियोगाचा खटला भरावा. आणि त्वरित सजा द्यावी. पुढे या प्रकाराला भ्रष्ट्राचारास आळा बसेल........... या भ्रष्ट्राच्यार्याना आंदोलन करण्यास मनाई करावी..........





Sunday, October 16, 2011

पुत सुपुत की धन संपदा ! पुत कुपुत की धन संपदा !!

डिझेल_पेट्रोल माफियांनी मालेगवाचे अपर जिल्हाधिकारी यशवंत सोनावणे यांना जिवंत जाळून मारल्यानं देशात खळबळ उडाली होती .....
............पण याच आठवड्यात CBI ने या जळीत हत्याकांडाचा पर्दाफाश केला. दिसते तसे नसते म्हणून जग फसते याची प्रचीती या पर्दाफाश वरून होते.  हे अपर जिल्हाधिकारी यशवंत सोनावणे महाशय खाकी वर्दीचा गैरवापर करत या वर्दी आड बेईमान भ्रष्ट्राचार गुन्हेगार जगता  कडून खंडणी वसूल करत असल्याचे CBI ने जाहीर केले. ..पण  या बेईमानी च्या धंद्यात सुद्धा इमानदारी पाळावी  लागते हे सोनावणे विसरले, ..........
 
 
 

Wednesday, October 12, 2011

Ultimate pic !!!

its happens only in india !!
why we are proud to be Indian , this is one of the reasion India defined - In one pic.  
Ultimate pic.
                                   Salute to these parents.

.ये पुडी सब्जी गये सात पुरखो से उसके यहां बनी नही..

राहुल गांधी उत्तर प्रदेश झांसी जिले के मेधकी गांव के मरौनीपुर इलाके में एक दलित के यहां बिना बताए पहुंच गए। आधी रात को कुंजीलाल के घर पहुंचे और वहां पूड़ी-सब्जी खाई। मिडिया के सामने महंगाई के खिलाफ चिल्लानेवाले वाले मध्यम वर्ग ने इससे कुच्छ सिखना चाहिये...... जो गरीब आधी  रात को घर आये मेहमान को पुडी-सब्जी खिला सकता है ,...... .............
 
 

Tuesday, October 11, 2011

गुन्हेगाराला त्याचा बचाव करण्याचा अधिकार आहे

लंडन मध्ये दाउद इब्राहिमच्या साथीदाराला इकबाल मिर्ची ला   एका व्यापाऱ्याला धमकी देण्याच्या प्रकरणा वरून अटक झाली..... त्या इकबाल मिर्चीचे चुकलेच. लंडन मध्ये धमकी प्रकरणावरून अटक करून घेण्या पेक्षा त्या मुर्खाने इंडियात आरामशीर राहून ५-२५ व्यापारयांचे मुडदे पाडले असते , दिवसा ढवळ्या खून केले असते तरी त्याचा या धर्मनिरपेक्ष देशात बाल सुद्धा बाका झाला नसता. आणि चुकून पकडल्या गेला असता तर मायबाप राजकरणी नेते, मानवाधिकारी शबाना भट्ट कंपनीनी त्यास सोडवले असते. आणि अखेर शंभर अपराधी सुटले तरी चालतील पण गुन्हेगाराला त्याचा बचाव करण्याचा अधिकार आहे म्हणत न्याय देवते ने त्याला बचावाची संधी दीली असती...........विविध राज्य सरकारांनी इक्बाल मिरचीला सजा झाली तर राज्यात रक्ताच्या नद्या वाहतील कायदा सुव्यवस्था कोलमडून पडेल म्हणत विधिमंडळात त्याला सजा करू नये म्हणून ठराव पास केले असते..........  नौकरशाही आणि नेते वर्गाने त्याच्या फाईली गायब केल्या असत्या .........  आणि अखेर   दया सागर  राष्ट्रपती यांनी त्यांना घटने प्रमाणे मिळालेल्या अधिकाराचा वापर करत  सजा माफ केली  असती. आणि तो सुखाने आलिशान जीवन जगात जगातील सर्वात सुरक्षित तिहार तुरुंगात आपला खंडणी वसुलीचा धंदा करत राहिला असता

Monday, October 10, 2011

गाढवावर बसलेल्या शैख चिल्ली सारखी आपल्या मनमोहन सरकारची अवस्था झाली आहे.

पावसाळा संपला नाही   तरी .... ..... आताच  शहरात  आठ घंटे वीज कपात सुरु झाली आहे आणि खेड्यात तर मनमोहन भरोसे वीज कधी येईल कधी जाईल याची शाश्वती ....... तरी पण भारत जगातील महाशक्ती असल्याचे गाजर दाखवत जनतेला मूर्खाच्या नंदनवनात फिरवत आहेत. अति झाले आणि हसू आले अशी आपली गत झाली आहे. आता आपल्या नशीबी ह्याहूनही अधीक घोर भोग आहेत ते भोगलेच पाहिजे .  या विजें  शिवाय भारत महासत्ता कसा होणार हे मनमोहन चिदंबरम मुखर्जी आणि मोन्तेक्सिंगच जाणे.
पाणी आणि विजें अभावी मोठ्या शहरातील वधुपिते आता तर मराठवाड्यात मुली देण्यास तय्यार नाही. याचे वाईट सामाजिक परिणाम लहान शहरावर होतील . ही छोटी गावे उध्वस्त तर होतीलच, पण त्याच बरोबर नियोजन शून्यरीत्या शहरे  विकसित होत असल्यामुळे शहरी जीवन ही धोकादायक बनेल.  गाढवावर बसलेल्या शैख चिल्ली सारखी आपल्या मनमोहन सरकारची अवस्था झाली आहे. विकासाच्या  दिशेने जाणारे गाढव भारताला कोठे घेऊन जाईल हे मात्र त्या गाढवावर स्वार झालेल्या स्वारास  माहित नाही. 

Saturday, October 8, 2011

पंचाताराकीत हॉटेल मध्ये २ महीने वास्तव करून देखील हे जोडपे आत्महत्या करण्यास जीवन संपवण्यास का प्रवृत्त होते ?

पणजी - एक आयटीत काम करणारं तरुण जोडपं. दोघांना गलेलठ्ठ पगार. दोघांनी बक्कळ पैसा कमावला. खूप खूप एन्जॉय केलं. सारं जग पालथं पाडलं. पण आता काय...? हा प्रश्‍न त्यांना पडला. शेवटी त्यांनी मृत्यूही हसत हसत स्वीकारला. त्यातही समाधान शोधलं.
एक धागा सुखाचा, शंभर धागे दुःखाचे जरतारी हे वस्त्र माणसा, तुझिया आयुष्याचे या वस्त्राते विणतो कोण ? एक सारखी नसती दोन कुणा न दिसले त्रिखंडात त्या, हात विणकऱ्याचे ! ग. दि. माडगूळकर या आधुनिक वाल्मिकी यांनी आयुष्याचे सार या दोन ओळीत सांगितले. दु:ख अनावर झाले की माणसाला हसू येते, आणि सुखाचा अतिरेक झाला की रडू येते. तस झाल. आनंदाचा मुखवटा चेहऱ्यावर लावून सुखी असल्याचा आव आणता येतो पण सुख मनापासून उपभोगता येत नाही, नुसता देखावा असतो आणि एका वेळ अशी येते की हा देखावा करण ही अवघड होऊन बसत हे सार सहन होत नाही आयुष्यात पोकळी निर्माण होते, समोर सर्व सुखे हात जोडून उभी असतात पण ती उपभोगण्याची इच्छाच होत नाही. या अनिच्छेने मग ही सर्व सुखे एखाद्या जादूगाराच्या मायाजाला प्रमाणे भासतात . जादू खतम मायाजाल खतम, या उक्ती प्रमाणे जीवनाचा निरथकपणा समोर येतो आणि मग अश्या शोकांतिका घडतात. 
या शोकांतिकास आजचे गतिमान स्वयंकेंद्रित जीवनशैली कारणीभूत आहे. एक तीळ सात जणात वाटून खावा अशी संस्कृती , सुख दुख: सुद्धा वाटली जातात .दुख:इतरांना सांगितले तर कमी होते तर सुख इतरात वाटले तर वाढते म्हणतात पण आज बंद दरवाज्याच्या संस्कृतीत माणसाचे एकाकीपण वाढत आहे आणि हेच एकाकीपण मग जीवाच्या मुळावर येते. पंचाताराकीत हॉटेल मध्ये २ महीने वास्तव करून देखील हे जोडपे आत्महत्या करण्यास जीवन संपवण्यास का प्रवृत्त होते ? हे एक कोडेच आहे.
http://www.esakal.com/esakal/20111008/4909221233719310182.htm
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/10275156.cmshttp:
मेरा अज़्म इतना बलंद है कि पराये शोलों का डर नही !
मुझे ख़ौफ़ आतिशे-गुल से है कही ये चमन को जला न दे !!

Thursday, October 6, 2011

पंजाब मधून प्रसिद्ध होणारे पंजाब केसरी.......

आजच्या बाजारीकरणाच्या युगात प्रत्येक गोष्टीला विक्री मूल्य भाव आलेला आहे. स्वातंत्र्यपूर्वकाळातील वर्तमान पत्राचे स्वतंत्र निर्भीड वाचकांचे हीत पाहणारे असे जे स्वरूप होते त्यात सुद्धा झपाट्याने बदल झाला. आज आपण जे वर्तमान पत्र वाचतो त्याच्या पहिल्या पानावरील मुख्य बातमी पासून ते संपादकीय, विविध लेख, नेत्यांच्या राजकारणाच्या बातम्या ते शेवटच्या पानावरील खेळ बातम्या एव्हढेच काय आंदोलनाच्या जनतेच्या हिताच्या अहिताच्या बातम्या सुद्धा पेड न्यूजच असतात. त्याच बरोबर वर्तमान पत्राचे मालक हे भांडवलदार असल्या मुळे सर्वच गोष्टी  पैश्यात मोजल्या जातात. संपादक वार्ताहर हे पगारी नौकर असल्या......................

Tuesday, October 4, 2011

साध्या ZP च्या सभासदाचे नातेवाईक गावात टग्गेगिरी करत असतात ...

रॉबर्ट वडेरा हे भारतीय उद्योजक आहेत. मात्र, उद्योजकाऐवजी त्यांना प्रियंका गांधींचे पती आणि सोनिया गांधींचे जावई म्हणूनच जास्त ओळखले जाते. रॉबर्ट वडेरा देशाचे भूदल, नौदल व हवाई दलाच्या प्रमुखांपेक्षाही मोठे असल्याचे सिद्ध झाले आहे. कारण ज्या लोकांना देशांतर्गत विमानतळावर तपासणीतून जावे लागत नाही, अशा लोकांच्या यादीत रॉबर्ट यांच्या नावाचा समावेश आहे. 28 सप्टेंबर 2005 रोजी रॉबर्ट यांचे नाव या यादीत आले होते. ब्युरो ऑफ सिव्हिल एव्हिएशन सेक्युरिटीने देशभरात एक पत्रक काढले होते. रॉबर्ट वडेरा जेव्हा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुपसह प्रवास करतील तेव्हा त्यांची तपासणी करण्यात येऊ नये, असे या पत्रकात म्हटले होते. देशाच्या भूदल, नौदल व हवाई दलाच्या प्रमुखांनाही तपासणीतून जावे लागते, मग रॉबर्ट वडेरांना ही सूट कशासाठी असा प्रश्न तेव्हा उपस्थित झाला होता. अनेकांनी सरकारच्या या निर्णयावर टीका केली.

हा भ्रष्ट्राचार नाही बर का..... ! आपण उगीच त्यांच्या नावाने ओरडतो. ते हायकमांड चे जावाई आहेत. मग त्याना या सवलती मिळणारच , आपण जर असे जावई झालो असतो तर आपणाला ही या सवलती मिळाल्या असत्या आणि आपण त्या उपभोगल्या असत्या की नाही..............  आहो साध्या ZP च्या सभासदाचे नातेवाईक गावात टग्गेगिरी करत असतात ........ वडेरा तर देशाच्या हायकमांड चा जावई आहे. तो जास्त टग्गेगिरी करणारच.......... यांच्या पूर्वजांच्या त्यागाची जरा आठवण ठेवा ...कृतघ्न होऊ नका.
मेरा अज़्म इतना बलंद है कि पराये शोलों का डर नही !
मुझे ख़ौफ़ आतिशे-गुल से है कही ये चमन को जला न दे !!

Monday, October 3, 2011

...जय हो योजना आयोग क़ी जय हो!....

इन मासूम चेहरे देखकर ये बात सच लगाती है क़ी,  छोटी-छोटी खुशियाँ ही मिलकर एक बड़ी खुशी बनती है। इसलिए छोटी-छोटी खुशियों का आनन्द लीजिए, बाद में जब आप उन्हें याद करेंगे तो वही आपको बड़ी खुशियाँ लगेंगी।
.......मगर इन मासूम बचों को क्या मालूम इंडिया क़ी महान सरकार का योजना आयोग  इनकी गरीबी क़ी व्याख्या करने मे ही परेशां है! अगर ये फोटो मोंटेकसिंग देखेंगे तो ये इन मासूम बच्चों को करोडपति बताकर उनपर टैक्स लगा देंगे!  सत्ताधारी  और विपक्ष  हमेशा क़ी तरह इस बात का राजनैतिक बवाल खड़े कराके खुद का स्वार्थ साधने मे मस्त है. और मिडिया नामक बन्दर को तो हाथ मे कोलित मिल गया और वो आग लगाने काम  जोरशोर से करने मे लगा ! जय हो योजना आयोग क़ी जय हो!

Sunday, October 2, 2011

मै आपसे सिर उंचा करके बात कर सकता हुं....

आजच्या बाजारीकरणाच्या युगात राष्ट्रीय नेत्यांचे वाढदिवसां  चे ही बाजारीकरण झाले आहे. आज महात्मा गांधी आणि पाकिस्थानला युद्धाच्या  रणांगणात धूळ चारणाऱ्या जयजवान जय किसान चा नारा देत भारताची प्रतिमा उंचावणाऱ्या साधी राहणी उच्च विचारसरणी असणाऱ्या लाल बहादूर शास्त्री यांचा ही आज वाढदिवस आहे. पण आजच्या  मतांच्या बाजारात यांच्या  विचारसरणी किमत 0 शून्य असल्या मुळे त्यांची आठवण कोणत्या ही पक्षाला मिडिया सम्राटाना झालेली दीसत नाही. भारतात फक्त आणि फक्त गांधीजी आणि नेहरू घराणेच त्यागमय असल्याचे आणि देशाचे भाग्यविधाता असल्याचे मायाजाल पसरवत स्वतःह चा स्वार्थ साधत  देश विनाशाच्या संकटात लोटल्या जात आहे.
 
अत्यंत साधे राहणीमान व प्रखर देशाभिमान, भारताचे पंतप्रधान म्हणून घेतलेले लोककल्याणकारी निर्णय, यामुळे लालबहादूर शास्त्रींविषयी प्रत्येक भारतीयाला अभिमान आहे  जेमतेम दीड वर्ष   पंतप्रधानपदवर राहिलेला पण देशाच्याच नव्हे, तर जगाच्या इतिहासात अजरामर झालेला पंतप्रधान म्हणूनच लालबहादूरांची आठवण राहिली आहे.
पाकिस्तानचे लष्कर प्रमुख आयुबखान हे धिप्पाड आणि उंच होते तर लालबहादूर शास्त्री उंचीने लहान होते. आयुबखान यांनी त्यांना त्यांच्या उंची वरून छेडले असता शास्त्रीजींनी ताडकन मूँहतोड उत्तर दीले. मै आपसे सिर उंचा करके बात कर सकता हुं, मगर आपको मेरे साथ बात करते वक्त  मेरे सामने सर झुकाकार बात करनी पडेगी ध्यान मे रखो . याला म्हणतात हजरजबाबी पणा.
आघाडीवरचा जवान आणि शेतामधला किसान हेच भारताचे खरे भाग्यविधाते आहेत, हे शास्त्रींनी ओळखले होते. त्यांच्या हातात नवसमाज घडविण्याची ताकद आहे हे शास्त्री जाणून होते. त्यांच्या या विचारांची आज भारताला अधिकच गरज आहे.

Saturday, October 1, 2011

.....पण आजच्या स्पर्धेच्या वेगवान टू मिनटस जमान्यात हे असले चोचले पुरविणे शक्य नाही.

घरातील आज्जी आई, बहीण,  घर धनीण  अश्या प्रकारे धगधगत्या लाकडाच्या  चुल्हीवर धुराच्या आसमंतात भाकऱ्या थापत असते आणि समोर बसलेल्या घरातील माणसाना चुल्ही  वरून सरळ  ताटात  वाढत असते ते कुटुंब जगातील सर्वात सुखी श्रीमंत अशी माझी जगातील सर्वात सुखी कुटुंबाची  व्याख्या आहे. स्त्री मुक्तीवाद्याची क्षमा मागून.
घरातील भाकर-पोळी  आणि हॉटेल मध्ये मिळणाऱ्या तंदूर रोट्या यात जमीन आस्मान चा फरक असतो. घरातील भाकर-पोळी गरमागरम खा कींवा दोन दिवसांची शिळी झालेली खा ती चविष्ठच लागेल. कारण त्यात घरातील करणाऱ्या स्त्रीचे प्रेम माया आपुलकी मिसळलेली असते. तर धंदेवाईक हॉटेल मधील तंदूर नान पाच मिनटात थंड झाली की ती रबरा सारखी वातड लागून खावी सुद्धा वाटणार नाही.......
गरमागरम भाकर , दगडी वरवंट्यावर ओबोड धोबड वाटलेला हिरव्या मिरच्याचा अद्रक लसून घालून केलेला कच्चा खर्डा. गावरान घाण्यावर फिल्टर न लावता काढलेले करडीचे  तेल. हे जेवण पंच सप्त तारांकित हॉटेलच्या पदार्था पेक्षा ही चविष्ट, रुचकर आणि आरोग्याला हितकारक असते.
भाकर गरम असो कींवा शिळी ट्या बरोबर झणझणीत कोरड्यास पिठलं असेल तर श्रीखंड-पुरी सुद्धा त्या समोर फिक्की पडेल. ........ पण आजच्या स्पर्धेच्या वेगवान टू मिनटस जमान्यात हे असले चोचले पुरविणे शक्य नाही. ..... काळा बरोबर बदलत जाणे हाच यावर उपाय.

.....और परदे पे मंजर बदल जाता हैं


फुल खिलते है, लोग मिलते हैं मगर
पतझड में जो फूल मुरझा जाते हैं
वो बहारों के आने से खिलते नहीं
सुबह आती है, रात जाती है, यूँही
वक्त चलता ही रहता है, रुकता नहीं
एक पल में ये आगे निकल जाता हैं
आदमी ठीक से देख पाता नहीं
और परदे पे मंजर बदल जाता हैं

Wednesday, September 28, 2011

भारत रत्न की तरह भ्रष्ट्र-रत्न पुरस्कार चालू किया जायेगा

शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का बाकी यही निशां होगा।' . तिहाड़ के दीवारों पर हर बरस लगेंगे भ्रष्ट्राचारियों के मेले ऐसी आज तिहाड़ जेल की हकीकत बन गयी है. भारत के सर्वधर्म समभाव की परंपरा सही मायने ने यंहा दिखाई देती है. ये जेल जात पात धर्म लिंग के आधार पर अपने यंहा रहने के लिये में कोई भेदभाव नही करता. हर कैदी यंहा दो वक्त के खाने पिने के साथ.दुनियादारी से सुरक्षित है . और अब तो किरणजी के कृपा से ये कुविख्यात जेल कैदी सुधारने की पाठशाला बन गया है. सर्वधर्म समभाव के साथ साथ सभी  राजकीय पक्ष नेता को भी यंहा ऐसे ही समभाव दृष्टी से देखा जाता है. जंहा DMK के राजा कानमोली , सपा के अमरसिंग , कांग्रेस के कलमाड़ी और भाजपा के कुलकर्णी जो आज ही तिहाड़ की छत्रछाया में आकर सब एक साथ आराम से रहेंगे. जल्द ही रेड्डी बंधू भाजपा भी यंहा पधारेंगे . यंहा कमी है तो सिर्फ राष्ट्रवादी कांग्रेस की .......मगर इनके डोन को पकड़ना मुमकीन नही नामुमकीन है..... साथ में एक न एक दिन सरकार उसे बाहर भेजने का आझाद करने का वादा पूरा करेगी इस भरोसे पर अंतक वादी संसद पर हमला करने वाला देश द्रोही अफजल गुरु भी यंहा आराम फरमा रहा है

Saturday, September 24, 2011

महा घोटाळ्याच्या हिशोब ठेवण्यासाठी भारताचा परम सुपर संगणकाच सरकारने द्यावा.

नवी दिल्ली । राष्ट्रकुल आयोजन घोटाळाप्रकरणी तिहार तुरुंगात असलेले आरोपी खासदार सुरेश कलमाडी यांच्यासह अन्य सात जणांना तुरुंगात संगणक उपलब्ध करून द्यावेत, असे आदेश प्रशासनाला देण्यात आले आहेत.

 
बरोबर आहे न्यायालयाचे . एव्हढा मोठा हजारो करोडोचा कॉमन वेल्थ चा घोटाळा , त्याचे हजारो भागीदार, यांचा हिशोब हा हाताच्या दहा बोटं वर थोडाच करता येणार आहे. त्यातच स्मृती नष्ट होण्याचा धोका हा सर्व अभ्यास करून त्यांना संगणक उपलब्ध करून देणे आवश्यक आहे, असे न्यायालयाचे मत झाले.  आणि कलमाडी  तुरुंगाच्या भिंतीवर  कोळश्यानी हा हिशोब लिहून ठेऊन करण्यास काय परकीय सरकारच्या  इंग्रजांचे कैदी आहेत. स्वतंत्र भारताच्या मंत्रिमंडळाचे संसदेचे ते इज्जतदार सदस्य आहेत. खरे तर त्यांना या महा घोटाळ्याच्या हिशोब ठेवण्यासाठी भारताचा परम सुपर संगणकाच सरकारने द्यावा.

Sunday, September 18, 2011

earthquake

6.11pm, 6.5 Ranged earthquake in Rajasthan, U.P., Bihar, Sikkim, Dilli, Zarkhand....

Report · 21:05

koi neta mara kya???? shubh samachar bataye
... ...
Report · 21:06

Badluck, no one...........

Report · 21:07
ab inka kya karana arthquake bhi inhe mar nahi sakata .
 
Chandan Bora  Better Luck Next Time
Shivin Garg We need an earthquake, whose epicentre is below the Parliament......at the time , when Parliament is in session with full attendance.....and with an intensity, which completely flattens the Parliament only.....

पितृपंधरवडा/ पितृपक्ष..............

भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा ते भाद्रपद कृष्ण १५ या पंधरा दिवसांच्या कालावधीला पितृपक्ष किंवा पितृपंधरवडा म्हणतात.
पितृपंधरवडा/ पितृपक्ष या कालात पृथ्वीवरील (मृत्यूलोकातील) माणसांकडे त्यांचे पितर निवासासाठी येतात. हे देवलोकातून, मृत्यूलोकातून, नरकातून, प्रेतयोनीतील असू शकतात. अश्या खोट्या भ्रामक चुकीच्या मूर्खपणाच्या  अंधश्रद्धा समाजात पसरवून सामान्य , बहुजन जनतेला लुबाडण्याचा राजरोस चालणारा हा उच्चवर्णीय वर्गाचा कुटील डाव मोडून काढण्याची आज गरज आहे. एकदा मेल्यावर सगळे संपते. त्या नंतर मानवी आत्म्याचे काय होते हे जगातील जिवंत असणाऱ्या कोणत्याही मानवाला माहीत नाही. आणि याचाच गैरफायदा घेत सामान्य, अडाणी जनतेला लुबाडण्याचा धंदा गेली हजारो वर्ष चालू आहे. श्राद्धात सांगितलेले वस्त्र (ऐच्छिक), त्रयोदशगुणी विडा, दक्षिणा इ. प्रकार करून आपल्या आई वडीलांच्या आत्म्यास शांती मिळवण्या पेक्षा , ते जिवंत असताना त्यांना चार घास सुखाने, प्रेमाने खाऊ दीले, त्यांचा आत्मसन्मान जपला, त्यांना मानाने वागवले तर ते प्रेत योनीत भूत योनीत कश्याला जातील.
ज्या मुलांना तळहाताच्या फोडा प्रमाणे  प्रेमाने जपले, दुधा पेक्षा साय महत्वाची म्हणत नातवंडाना त्यांनी सांभाळलेले असते, असे  ते आई वडील,  नातुचे आजी आजोबा मेल्यावर आपल्या मुलाला सुनेला नातवंडाना छळायला कश्याला या जगात येतील . हा साधा विचार सुद्धा आपण करत नाही ही आपल्या समाजाची शोकांतिका.
आई वडीलांच्या नावाने जेवण देण्याची जर एव्हढीच हौस असेल तर कोण्या अनाथ घरातील विद्यार्थ्यांना जेवण द्या, त्यांच्या शिक्षणा करता मदत करा, रात्री अंधारात रस्त्यावर कुडकुडत झोपणाऱ्या गरीबाच्या अंगावर चादर घाला हीच खरी सेवा. उगीच ज्यांच्या कडे आहे त्यांना वस्तू देऊन तुमच्या पितरांना नक्कीच शांती लाभणार नाही. अनाथांचे नाथ व्हा हीच खरी ईश्वर सेवा...........

Saturday, September 17, 2011

नांदेड चा आता शाळामध्ये ""आदर्श घोटाळा":-आपलं नांदेड च्या सौजन्याने

नांदेड चा आता शाळामध्ये ""आदर्श घोटाळा":-
.......नांदेड जिल्हय़ातील प्राथमिक व मा...ध्यमिक शाळांमध्ये बोगस विद्यार्थी दाखवून कोटय़वधी रुपयांची अनुदाने लाटणाऱ्या संस्थाचालकांमध्ये सुमारे ९० टक्के राजकारणीच आहेत.
...नांदेड जिल्हय़ातील सगळय़ा शाळांमधील विद्यार्थ्यांची चार दिवसांत पटपडताळणी करताना मतदानाच्या वेळी वापरण्यात येणारी शाई मुलांच्या बोटांना लावण्यात आली. तरीही परराज्यातून वा शेजारच्या जिल्हय़ातून विद्यार्थी आणले जातील, असे लक्षात आल्यावर जिल्हाधिकाऱ्यांनी शालेय विद्यार्थ्यांच्या वाहतुकीस बंदी घातली. या तपासणीनंतर जे सत्य बाहेर आले, ते डोळे विस्फारायला लावणारे आहे. सुमारे ""दीड लाख"" विद्यार्थ्यांची बोगस नोंदणी करून संस्थाचालकांनी शासनाची लुबाडणूक केल्याचे त्यात स्पष्ट झाले.
....विद्यार्थीसंख्या खोटी दाखवायची आणि शिक्षकांची पदे निर्माण करायला भाग पाडायचे. या पदांवर शिक्षक भरती करताना प्रचंड भ्रष्टाचार करायचा आणि नंतर खोटय़ा विद्यार्थ्यांच्या नावे मिळणारे अनुदानही लाटायचे, असा हा प्रकार आहे.
...नव्या आकडेवारीनुसार तेथे किमान तीन हजार शिक्षक अतिरिक्त ठरण्याची शक्यता आहे. एवढय़ा मोठय़ा प्रमाणावर अतिरिक्त झालेल्या शिक्षकांना काम देणेही शासनाला शक्य होईल की नाही, हे सांगता येत नाही. याच नांदेड जिल्हय़ात २००४ मध्ये अशीच पटपडताळणी झाली होती. तेव्हा सुमारे ३५० शिक्षक अतिरिक्त ठरले होते. त्यातील अडीचशे शिक्षकांना कोठे ना कोठे काम मिळाले. परंतु सुमारे शंभर शिक्षक आजही विनाकाम वेतन घेत आहेत.
....एकाच विद्यार्थ्यांचे नाव चार-चार शाळांमधील पटावर नोंदविण्यात येते आणि नव्या तुकडय़ांची मागणी केली जाते. आताही शासनाकडे आठ हजार तुकडय़ा वाढवण्याचे प्रस्ताव आले आहेत.
....बोगस तुकडय़ा काढून कोटय़वधी रुपयांचा मलिदा खाला आहे,
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.और स्वर्ग में महात्मा गाँधीजी आंसू बहा रहे थे.....

मोदी ने गुजरात मे ३ दिन का अनशन सदभावना शांती अमन के लिये शुरू किया..... और पुरे भारत मे अनशन का मुद्दा सामने आया.....  सभी राजकीय पक्ष  मे हलचल पैदा  हुवी. ... कॉंग्रेस प़र भी इसका काफी असर  हुवा....... लालू ने भी अनशन करने  का फैसला किया था...... मगर राबडीदेवी ने उन्हे अनशन करने से मना किया........कियों की वो लालू के अनाज से लेकर चारा खाने की आदत से अच्छी तरह वाकीफ थी...... ...   राज ठाकरे ने भी अनशन करने का फैसला कीया था.... मगर ठाकरे घराना अनशन से ज्यादा खाने में और ठोकशाही में विश्वास रखता इसी लिये ये गाँधीवादी मार्ग से चलने से उन्हें मना कीया........   उधर उद्धव ठाकरे ने भी अनशन पर बैठने का इरादा अपने फोटोग्राफी और  कैमरे के  शौक के खातिर छोड़ दीया......... जय ललिता  ने तो अपने मंत्री और प्रतिनिधि को ही मोदी के ही अनशन में भेज क़र खुद का अनशन से छुटकारा प्राप्त कीया......


चिअर्स गर्ल्स सह बाजारीकरणाच्या हव्यासापायी खेळाचा सत्यानाश झाला आहे.

कार्डिफ - इंग्लंड दौऱ्यामधील मानहानीला दुखापती हेच प्रमुख कारण असल्याचे मत भारताचा कर्णधार महेंद्रसिंह धोनी याने आज (शनिवार) व्यक्‍त केले. ....... दुखापत नाही तर मैच फिक्स करता आल्या नाहीत , देशा करता नव्हे तर पैश्या करता खेळण्याची असलेली लोभी वृत्ती.  दुखापती असून हि व्यैयक्तिक विक्रमा साठी साठी संघात जागा अडवून ठेवण्याची लोभी वृत्ती. सराव करण्या पेक्षा शॉपिंग रेसिंग करता वेळ घालवणे अशी अनेक करणे पराभवास कारणीभूत आहेत . हेच खेळाडू IPL सामन्यात मात्र पैसा मिळतो म्हणुन जीव तोडून खेळतात. त्या वेळी कोणी आजारीपंणाचे दुखणे रडत नाही. जाहिरात करण्यासाठी दुखापत नाही, पण देशा करता खेळताना मात्र कच खातात. फक्त परदेश प्रवास, शॉपिंग, मौजमस्त्ती, या करताच संघात वर्णी लावून घेतली जाते. उगाच भूतकाळातील  कामगिरी चा बडेजाव करून संघात खोगीर भरती करण्या पेक्षा  जुन्या खोडांना संघातून हाकलून देणे हाच यावर एकमेव उपाय. चिअर्स गर्ल्स सह बाजारीकरणाच्या हव्यासापायी खेळाचा सत्यानाश झाला आहे. हेच खरे.
अहो ह्या क्रिकेट ला खड्य्यात घाला , देश्या पुढे दुसर्या खूप समस्या आहेत , कृपया क्रिकेट ला डोक्यावर घेऊ नका ,अमेरिका ,चीन ,जपान ,रशिया ,कोरें ,कॅनडा -असला भिकार खेळ खेळत नाहीत  फिर भी मेरा देश महान.

Friday, September 16, 2011

मराठी भावगीत

आकाशी झेप घे रे पाखरा, सोडी सोन्याचा पिंजरा

आकाशी झेप घे रे पाखरा, सोडी सोन्याचा पिंजरा
तुज भवती वैभव माया, फळ रसाळ मिळते खाया
सुखलोलुप झाली काया, हा कुठवर वेड्या घेसी आसरा
घर कसले ही तर कारा, विष समान मोती चारा
मोहाचे बंधन द्वारा, तुज आडवितो हा जैसा उंबरा
तुज पंख दिले देवाने, कर विहार सामर्थ्याने
दरी डोंगर हिरवी राने, जा ओलांडून या सरीता सागरा
कष्टाविण फळ ना मिळते, तुज कळते परी ना वळते
हृदयात व्यथा ही जळते, का जीव बिचारा होई बावरा
घामातून मोती फुलले, श्रमदेव घरी अवतरले
घर प्रसन्नतेने नटले, हा योग जीवनी आला साजिरा
गायक/गायिका: 
सुधीर फडके.
संगीतकार: 
सुधीर फडके.
चित्रपट: 
आराम हराम आहे.

Tuesday, September 13, 2011

माझ्या जवळचा एक सत्य अनुभव मित्रांसाठी इथे देत आहे.
सोसायटीत ब्राह्मण, मराठा, दलित या तिन्ही समाजाची घरे शेजारी आहेत.
दोनतीन महिन्यातच इथे रहायला आले आहेत, अजून माने जुळायची आहेत.
अशात दलित समाजाच्या कुटुंबातील अल्पवयीन मुलाने,  मराठा समाजातील मुलीची
शाब्दिक छेड काढली. मुलीने घरी सांगताच साहजिकच तिचे वडील संतापले. आणि त्यांनी
रागाच्या भारत संबंधीत मुलाच्या घरी जाऊन दोन चापट्या मारल्या.
नंतर दलित मुलाचे आईवडील घरी येईपर्यंत त्यांचे त्या भागात राहणारे
समाजसेवक पुढारी समाज बांधव घरी हजर झाले. तुमचा मुलगा नादान आहे.
जरी त्याचे चूक असेल तरी, त्यांनी त्याला घरी येऊन मारायची हिम्मत केलीच कशी...?


5 करोड़ का ऑक्सीजन जो कि पेड़-पौधों द्वारा हमे फ्री में मिलता है

Shivin Garg
एक आदमी एक दिन में इतना ऑक्सीजन लेता है, जितने में 3 ऑक्सीजन के सिलेंडर भरे जा सकते हैं.
एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत होती है रु.700 इस तरह हम देखते हैं कि एक आदमी एक दिन में
रु.2100 (700X3) की ऑक्सीजन लेता है.
और 1 साल में रु.766500 कि और अपने पूरे
जीवन (अगर आदमी कि उम्र 65 साल हो) में लगभग रु.... 5 करोड़ का ऑक्सीजन लेता है .जो कि पेड़-पौधों द्वारा हमे मुफ्त में मिलता है और,,,,,,,,  हम कृतघ्न उन्ही पेड़ पौधों को समाप्त कर रहे है|
SPREAD THIS MESSAGE AS MUCH AS YOU CAN. SAVE TREES! SAVE FUTURE